I write this as a sequel to a poem I read an year ago. I hope the legacy will continue.
अब कहना है अलविदा प्रिये
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो
First Year की Labs
वो देर रात
की chats
वो
Societies के selection
वो Mid
Sem की Tension
वो NSS का camp
वो room
पे आया damp
वो
Vikramshila में class
वो wing
की भाट
वो
seniors वो professors वो बचे
सभी curse
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो पहले SF की हरियाली
वो लम्बी lines की परेशानी
वो पहली गर्मी
की पहली बूँद
वो पहले Tempo shout की पहली
गूँज
वो Illu
की रातें
वो बंदियों की बातें
वो DC की speed
वो GC में lead
वो OP देना, न देना,
लेना, न लेना
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो
intern के load
वो room
पे घुसे toad
वो 2.2 की सैर
वो
Halls में बैर
वो
Poltu और Publi
वो
Insti Diamond Jubilee
वो
Cheddis पे सुबह बिताना
वो
classes के बीच Tikka जाना
वो
Sahara वो Heritage वो CCD
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो पहले crush से पहली
बात
वो फिर 2.2 पे दिखना
हर रात
वो पहले birthday की पहली
लात
वो फिर treat पे जाना
wing के साथ
वो पहले viva का पहला
डर
वो फिर end sem में जाना
night out मार कर
वो
seniors के funde
वो सोना पूरे
sunday
वो Dep वो Hall वो Societies
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो mess
की बिल्ली
वो
Gymkahana building लाल पीली
वो हर Dep farewell पे खाने
जाना
वो Hall
day पे रूम सजना
वो उधारी लेकर सुट्टा
मारना
वो नहाते हुए गुनगुनाना
वो full
speed पर cycle चलना
वो SN के बाहर
धीमे हो जाना
वो TSC वो Jnan Ghosh वो Vikramshila
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो देर रात
को Kathleen जाना
वो पूरा weekend सिर्फ़ Maggi खाना
वो
groups में cheer करने जाना
वो
drams में पेड़ बन
जाना
वो अच्छे grades वाले breadth चुनना
वो
Faculty Feedback के समय भड़ास निकालना
वो दारू पीकर
टल्ली हो जाना
वो सुबह Hangover में क्लास
जाना
वो
Poker वो Rum वो धुआ
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो
Placement का “What the
Phuck!”
वो TV
series की लत
वो
movies देखने Cal जाना
वो सड़कों पे गाने
गाना
वो
Assignments में सर खपाना
वो फिर पूरा
assignment copy मारना
वो
Place होने के बाद
deregister हो जाना
वो Prof
के सामने अपना
रोना सुनना
वो फ़चपन वो OP वो
POR वो आख़िरी साल
अब कहना है
अलविदा प्रिये, याद आएगा
ये समा प्रिये
वो छोटी आँखों
से बड़े सपने
देखना
वो हर छोटे
बड़े मौके को
परखना
वो कुछ अलग
कर गुज़रने की
हिम्मत रखना
वो देश की
ज़रूरतों में ज़िंदगी
के अवसर ढूँढना
वो दूसरों की खुशी
में नाच लेना
वो हर कदम
पर साथ बढ़ना
वो न डरना
न झिझकना
वो अपने पर
भरोसा करना
वो दोस्ती वो सपने
वो यादें
अब जाने का
हुआ वक्त प्रिये, कह चले हम अलविदा प्रिये